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अरण्यकाण्ड · सर्ग 74

शबरी का स्वागत

एक वृद्ध साधिका धैर्यपूर्ण श्रम और वन से जुटाए फल से राम का स्वागत करती हैं।

5 मिनट का पाठ6+ · सरल पारिवारिक कथा3 दृश्य
  • आतिथ्य
  • भक्ति
  • दृढ़ता
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06 / 10अरण्यकाण्ड

पढ़ने से पहले

यह पुनर्कथन क्या करता है

लंबी तैयारी, सजग आतिथ्य और किसी साधना के पूर्ण होने को पहचानने की कथा।

इस वाल्मीकि प्रसंग का मौलिक पुनर्कथन। जूठे बेर वाला परिचित विवरण 3.74 में नहीं है, इसलिए उसे इस अध्याय से नहीं जोड़ा गया।

कथा मानचित्र

तीन स्थिर दृश्य

  1. 01तैयार रखा गया स्थान
  2. 02राम और लक्ष्मण का आगमन
  3. 03आगे के मार्ग का ज्ञान

इस कथा के पात्र

रामदेव स्वरूपलक्ष्मणपात्रशबरीपात्र

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हनुमान की पहली बातचीत

मित्रता का प्रस्ताव रखने से पहले हनुमान ऐसे शब्द चुनते हैं जिनमें विश्वास के लिए जगह हो।

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