युद्धकाण्ड · सर्ग 128
उत्तरदायित्व की वापसी
भरत वह दायित्व लौटाते हैं जिसे उन्होंने सँभाला; घर-वापसी केवल अंत नहीं, नया आरंभ बनती है।
नंदिग्राम में समाचार
लंका के संघर्ष के बाद लंबा मार्ग अयोध्या की ओर मुड़ा। हनुमान ने भरत तक पहले समाचार पहुँचाया: राम, सीता और लक्ष्मण लौट रहे हैं। वर्षों की प्रतीक्षा के सामने अचानक आगमन निकट था।
भरत ने सँभाले हुए अधिकार की रक्षा नहीं, उसे लौटाने की तैयारी की। वनवास भर जिस विश्वास को पादुकाओं ने चिह्नित किया था, अब उसे राम के सामने वापस रखा जा सकता था।
दायित्व सौंपना
अच्छे दायित्व-सौंपने में सँभाले गए काम की सच्चाई शामिल होती है। भरत ने राम का स्वागत कर राज्य लौटाया, पर उनके वर्षों का संरक्षण मिटा नहीं। मार्ग, निर्णय, चिंता और लोगों ने उनका ध्यान माँगा था। दायित्व लौटाना उस श्रम का सम्मान कर सकता था, उसे निजी अधिकार बनाए बिना।
राम ने पारिवारिक मिलन और सार्वजनिक समारोह के बीच दायित्व स्वीकार किया। सीता और लक्ष्मण भी अपने कठिन वर्षों के बाद लौटे थे; उनकी घर-वापसी भी देखी जानी चाहिए। कोई एक मुकुट हर व्यक्ति की कीमत को समेट नहीं सकता।
वापसी के बाद आरंभ
राज्याभिषेक को प्रायः उज्ज्वल अंत की तरह कहा जाता है। वह दैनिक शासन का आरंभ भी है: लोगों को सुनना, काम बाँटना, भूल सुधारना और उन मित्रताओं को याद रखना जिनसे वापसी संभव हुई। उत्सव सीमा-रेखा दिखा सकता था, आगे का काम नहीं कर सकता था।
भरत का संरक्षण, हनुमान के संदेश, सीता का धैर्य, लक्ष्मण का साथ और अनेक समुदायों की सहायता उस दिन के पीछे खड़ी थी। उत्तरदायित्व की वापसी संबंधों की ओर लौटना भी था।
स्रोत और संपादकीय संदर्भYuddha Kanda 6.128 in this web witness; handover at 6.128.1–12, homecoming from 6.128.23, and numbering is edition-specific
पुनर्कथन संकेत: मौलिक संक्षिप्त पुनर्कथन। राज्याभिषेक का यह अध्याय-क्रम संस्करण-विशिष्ट बताया गया है, सभी रामायण संस्करणों के लिए सार्वभौमिक नहीं।